देहरादून में गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। विक्रम शर्मा पर 50 से ज्यादा मुकदमे दर्ज थे और वह झारखंड का एक बड़ा गैंगस्टर था। उसने 2013 में देहरादून के बाजपुर में एक स्टोन क्रशर संचालित करने की अनुमति ली थी। अब सवाल यह है कि इतने बड़े अपराधी को यह अनुमति कैसे मिली? वहीं जबसे विक्रम सिंह की हत्या हुई है तबसे उत्तराखंड में राजनीति बहुत तेज हो गई है। वहीं विपक्ष सरकार के ऊपर अपराधी को संरक्षण देने का आरोप लगाती आ रही वहीं अब जो दस्तावेज आने आए हैं उनसे साफ पता चल रहा है कि विक्रम सिंह की कंपनी मैसर्स अमृत स्टोन केशर प्रा०लि० को 2013 में स्टोन क्रेशर लगाने की अनुमति दी गई थी।

विक्रम शर्मा की हत्या सिल्वर सिटी मॉल के अंदर हुई थी, जहां तीन अज्ञात लोगों ने उसे गोली मार दी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कई लोगों को हिरासत में लिया है। लेकिन जो सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है वो ये है कि आखरी उत्तराखंड में अन्य राज्यों के आपराधिक इतिहास रखने वाले अपराधियों को उत्तराखंड में पनाह दे कौन रहा है। सरकार चाहे किसी की भी क्या उत्तराखंड पुलिस ऐसे अपराधियों पर नजर नहीं रखती है। क्या उत्तराखंड में बाहर से आने वाले लोगों का सत्यापन सिर्फ कहने के लिए होता है? और कितने ऐसे अपराधी उत्तराखंड में खुलेआम घूम रहे हैं?

