
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत द्वारा पार्टी से इस्तीफा देने की सुबह से चल रही खबरों पर अब विराम लग गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने इन खबरों को पूरी तरह भ्रामक और गलत करार दिया है। पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि हरीश रावत ने पार्टी से कोई इस्तीफा नहीं दिया है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, हरीश रावत के पूर्व ओएसडी (OSD) चंदन जीना पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद मामला गर्म हो गया था। इस कार्रवाई के बाद हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर नैतिक आधार पर पार्टी के अपने दो पदों से कार्यमुक्त होने की इच्छा जताई थी। इस पोस्ट के बाद ही राजनीतिक गलियारों में उनके कांग्रेस छोड़ने और इस्तीफा देने की अफवाहें फैलने लगीं।
हालांकि, स्थिति को भांपते हुए हरीश रावत ने अपनी दूसरी पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया कि कांग्रेस उनके “खून और हड्डियों में रची-बसी है” और वे पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं।
करन माहरा का बयान: ED की कार्रवाई पर उठाए सवाल
कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने हरीश रावत के इस्तीफे की खबरों का खंडन करते हुए कहा कि रावत केवल अपनी नैतिक जिम्मेदारी के तहत दो पदों से अलग होना चाहते हैं, उन्होंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया है। वे किसी दबाव या झूठे आरोपों के आगे झुकने वाले नेताओं में से नहीं हैं।
भाजपा सरकार और जांच एजेंसी पर निशाना साधते हुए करन माहरा ने कहा:
चंदन जीना से जुड़ा यह मामला लगभग 10 साल पुराना है।
इतने लंबे समय बाद अचानक ED की यह कार्रवाई कई गंभीर सवाल खड़े करती है
केंद्र और राज्य सरकार को 10 साल पुराने मामले की याद अचानक क्यों आई, यह समझने वाली बात है।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई केवल राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है और भाजपा सरकार विपक्ष को दबाने का प्रयास कर रही है। फिलहाल, कांग्रेस नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि हरीश रावत पार्टी के मजबूत स्तंभ हैं और उनके इस्तीफे की खबरें महज एक अफवाह हैं।





